एकीकृत मुख्यालय रक्षा मंत्रालय (नौसेना), नई दिल्ली

नौसेना प्रमुख (सीएनएस)

एडमिरल सुनील लांबा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एडीसी

एडमिरल सुनील लांबा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एडीसी

31 मई 16 को एडमिरल सुनील लांबा ने 23वें नौसेना अध्यक्ष के रूप में भारतीय नौसेना की कमान संभाली।

एडमिरल लांबा, नौ-संचालन और दिशा के विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने पूर्वी और पश्चिमी दोनों बेड़े में कई जहाजों पर नौ-संचालन एवं संक्रियात्मक अधिकारी के रूप में काम किया है। उनके लगभग चार दशकों के अनुभव में समुद्र में कार्यकाल, विभिन्न समुद्रतटीय मुख्यालयों, संक्रियात्मक एवं प्रशिक्षण संस्थानों के साथ-साथ तीनों सेनाओं की संस्थाओं में कार्यकाल शामिल है। उनके समुद्री कार्यकाल में एक विशेष माइन काउंटर मेश़र वेसल, आईएनएस काकीनाड़ा की कमान के साथ-साथ आईएनएस हिमगिरी, स्वदेशी लिएंडर श्रेणी के फ्रिगेट, आईएनएस रणविजय, काशीन श्रेणी के विध्वंसक तथा आईएनएस मुंबई, स्वदेशी दिल्ली श्रेणी के विध्वंसक की कमान शामिल है। वह विमानवाहक पोत, आईएनएस विराट के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और पश्चिमी बेड़े के फ्लीट ऑपरेशन ऑफिसर भी रहे हैं।

एडमिरल लांबा ने अपने पूरे करियर के दौरान समुद्र में काम करने का गहन अनुभव हासिल किया है, साथ ही उन्होंने भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय नौसेनाओं के साथ प्रशिक्षण, संचालन और तीनों सेनाओं की सेवा के दायित्वों का निर्वहन किया है। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, कॉलेज ऑफ़ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद तथा रॉयल कॉलेज ऑफ़ डिफेंस स्टडीज, लंदन के पूर्व छात्र रहे हैं।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के प्रशिक्षण अधिकारी, रक्षा प्रबंधन कॉलेज में निर्देशन कर्मचारी और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के कमांडेंट के रूप में एडमिरल लांबा ने स्वयं को पेशेवर प्रशिक्षण के साथ गहराई से जोड़ा तथा भारतीय सशस्त्र बलों के अधिकारियों की भावी नेतृत्व क्षमता एवं कौशल को आकार दिया। स्थानीय अभ्यास दल (पश्चिम) में फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग संगठन के एक हिस्से के तौर पर उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान के जहाजों के मुकाबले के कौशल को बेहतर बनाया।

फ्लैग रैंक के प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने के बाद एडमिरल लांबा ने नौसेना में कई महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन किया। दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ़ स्टाफ के तौर पर उन्हें भारतीय नौसेना के भविष्य के लिए इसकी प्रशिक्षण कार्यप्रणाली में बदलाव की जिम्मेदारी दी गई। फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग के पदभार को ग्रहण करने के बाद एडमिरल लांबा ने युद्ध के दौरान जहाजों की प्रभावशीलता को बेहतर बनाने के लिए कई बदलाव किए तथा मुकाबले के लिए जहाजों पर की जाने वाली तैनाती को युक्तिसंगत बनाया। बाद में, उन्होंने महाराष्ट्र एवं गुजरात नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर के तौर पर अत्यंत महत्वपूर्ण महाराष्ट्र एवं गुजरात नौसेना क्षेत्र की कमान संभाली और बहुआयामी समन्वय तंत्र के साथ-साथ तटीय सुरक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण युक्तियों को लागू किया, जिसके बाद से समुद्र एवं तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

वाइस एडमिरल के तौर पर पदोन्नति के बाद वह पूर्वी नौसेना कमान के चीफ़ ऑफ स्टाफ बने और इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के कमांडेंट के रूप में पदभार संभाला। नौसेना के उप-प्रमुख के तौर पर अपनी योग्यता का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने नौसेना की संघर्ष क्षमता को बेहतर बनाने एवं बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रयास किया, साथ ही उन्होंने तीनों सेनाओं के समन्वय एवं संबद्धता को बेहतर बनाने की रूपरेखा तैयार की।

नौसेना अध्यक्ष के तौर पर पदभार ग्रहण करने से पूर्व, एडमिरल लांबा दक्षिणी एवं पश्चिमी नौसेना कमानों के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ रहे हैं, और इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण एवं कौशल विकास, सहक्रियात्मक युद्ध अभियानों, तटीय सुरक्षा एवं सलामती, तथा पश्चिमी समुद्र तट एवं लक्षद्वीप और मिनिकॉय द्वीपसमूहों में ढांचागत विकास को प्रोत्साहन दिया।

एडमिरल को उनके सराहनीय कार्यों के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल तथा अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है और वह भारत के राष्ट्रपति के मानद सैन्यादेशवाहक भी हैं। उन्होंने 01 जनवरी 17 को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया।

एडमिरल सुनील लांबा का विवाह श्रीमती रीना से हुआ है। उनकी दो पुत्रियां, मोनीषा एवं सुकृति तथा एक पुत्र अधिराज है।